UravaLegal AI

Legal Research Guide

एकपक्षीय (ex-parte) डिक्री रद्द कैसे कराएं — Order 9 Rule 13 CPC: आवेदन, 30-दिन समय-सीमा (Article 123), आधार, प्रक्रिया व फीस (2026 हिंदी गाइड)

26 August 2026 · Urava Research Desk

एकपक्षीय (ex-parte) डिक्री रद्द कैसे कराएं — Order 9 Rule 13 CPC: आवेदन, 30-दिन समय-सीमा (Article 123), आधार, प्रक्रिया व फीस (2026 हिंदी गाइड)

अगर आपके विरुद्ध बिना आपको सुने एकपक्षीय (ex-parte) डिक्री पारित हो गई है, तो आप उसी न्यायालय में जिसने डिक्री दी है, सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 9 नियम 13 (Order 9 Rule 13 CPC) के तहत डिक्री को अपास्त (set aside) कराने का आवेदन दायर कर सकते हैं — यह आवेदन परिसीमा अधिनियम, 1963 के Article 123 के अनुसार 30 दिन के भीतर दाखिल होना चाहिए। न्यायालय डिक्री तभी रद्द करेगा जब आप यह साबित कर दें कि (क) आपको समन की तामील (service of summons) सम्यक रूप से नहीं हुई थी, अथवा (ख) आप किसी पर्याप्त कारण (sufficient cause) से सुनवाई के दिन उपस्थित नहीं हो सके।

यह पृष्ठ आवेदन के दोनों आधार, 30-दिन की घड़ी कब से चलती है, देरी की माफी, दस्तावेज़, फीस, अपील (Section 96) से तुलना और वकील कब ज़रूरी है — सब क्रम से समझाता है।

एकपक्षीय (ex-parte) डिक्री क्या होती है

एकपक्षीय डिक्री वह डिक्री है जो न्यायालय तब पारित करता है जब प्रतिवादी (defendant) समन तामील होने के बाद भी सुनवाई के दिन न स्वयं और न अपने अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होता है, और मामला एक ही पक्ष (वादी) को सुनकर तय कर दिया जाता है। ऐसी डिक्री गुण-दोष (merits) पर होती है, इसलिए यह केवल स्थगन (adjournment) नहीं — यह एक अंतिम निर्णय है जिसे निष्पादन (execution) में भी लगाया जा सकता है, इसीलिए समय पर कार्रवाई ज़रूरी है।

राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (National Judicial Data Grid) के अनुसार भारत की ज़िला अदालतों में करोड़ों दीवानी मुकदमे लंबित हैं; व्यस्त कॉज़-लिस्ट, गलत पते पर समन, या अधिवक्ता की चूक के कारण एकपक्षीय डिक्री असामान्य नहीं है — और अधिकांश को Order 9 Rule 13 के सही व समय पर प्रयोग से पलटा जा सकता है।

डिक्री रद्द कराने के सिर्फ़ दो आधार

न्यायालय आपकी असहमति मात्र से डिक्री रद्द नहीं करेगा। आदेश 9 नियम 13 के अंतर्गत केवल दो में से किसी एक को सिद्ध करना होता है:

आधार आपको क्या दिखाना होगा
समन सम्यक रूप से तामील नहीं हुआ समन आप तक विधि-सम्मत ढंग (आदेश 5 CPC) से नहीं पहुँचा — गलत पता, फर्जी तामील, या प्रतिस्थापित तामील की शर्तें पूरी नहीं हुईं
पर्याप्त कारण (sufficient cause) आप बीमारी, दुर्घटना, समन न मिलने, अधिवक्ता की चूक, या अन्य वास्तविक कारण से उपस्थित नहीं हो सके, और आपकी मंशा उपस्थित होने की थी

"पर्याप्त कारण" का अर्थ है कि प्रतिवादी ने लापरवाही (negligence) नहीं बरती और वह ईमानदारी से सुनवाई के दिन उपस्थित होना चाहता था तथा उसने ऐसा करने का यथासंभव प्रयास किया। सर्वोच्च न्यायालय ने पारीमल बनाम वीना उर्फ़ भारती, (2011) 3 SCC 545 में स्पष्ट किया कि Order 9 Rule 13 के आवेदन पर न्यायालय का दृष्टिकोण उदार व लचीला (liberal and elastic) होना चाहिए, न कि संकीर्ण व दुराग्रही। इसी प्रकार जी.पी. श्रीवास्तव बनाम आर.के. रायज़ादा, (2000) 3 SCC 54 में कहा गया कि जब तक प्रतिवादी की ओर से जान-बूझकर देरी या दुर्भावना (want of bona fide) न हो, "पर्याप्त कारण" की उदार व्याख्या करनी चाहिए।

महत्वपूर्ण चेतावनी (proviso): आदेश 9 नियम 13 के परंतुक के अनुसार केवल समन की तामील में अनियमितता (irregularity) के आधार पर डिक्री रद्द नहीं होगी, यदि न्यायालय संतुष्ट है कि प्रतिवादी को सुनवाई की तारीख की जानकारी थी और उपस्थित होने के लिए पर्याप्त समय था।

समय-सीमा: 30 दिन, और घड़ी कब से चलती है (Article 123)

यह सबसे महत्वपूर्ण संख्या है। परिसीमा अधिनियम, 1963 के Article 123 के अनुसार एकपक्षीय डिक्री को अपास्त कराने के आवेदन की समय-सीमा 30 दिन है। पर घड़ी कब से चलती है, यह परिस्थिति पर निर्भर करता है:

यानी अगर आपको डिक्री की भनक ही नहीं थी क्योंकि समन कभी पहुँचा ही नहीं, तो 30 दिन डिक्री की तारीख से नहीं, बल्कि जानकारी की तारीख से गिने जाते हैं — यही Article 123 के अंतिम कॉलम की व्यवस्था है।

अगर 30 दिन बीत चुके हैं

अगर आप 30 दिन की परिसीमा चूक गए हैं, तो भी रास्ता बंद नहीं है — आप परिसीमा अधिनियम की धारा 5 (Section 5) के तहत विलंब माफ़ी (condonation of delay) का आवेदन Order 9 Rule 13 के आवेदन के साथ लगा सकते हैं, जिसमें देरी के हर दिन का पर्याप्त कारण शपथ-पत्र में समझाना होता है। देरी जितनी अधिक, स्पष्टीकरण उतना ठोस होना चाहिए। परिसीमा और घड़ी कब-कब रीसेट होती है, इसे हमारी विस्तृत हिंदी गाइड — दीवानी वाद की समय-सीमा: 3 साल या 12 साल, कौन-सा Article — में देखें।

आवेदन कहाँ और कैसे दायर करें (प्रक्रिया)

  1. न्यायालय: आवेदन उसी न्यायालय में दायर होगा जिसने एकपक्षीय डिक्री पारित की थी (आदेश 9 नियम 13 का पहला वाक्य) — अपील न्यायालय में नहीं।
  2. आवेदन का प्रारूप: एक विविध आवेदन (miscellaneous application) आदेश 9 नियम 13 सपठित धारा 151 CPC के अंतर्गत, समर्थन में एक शपथ-पत्र (affidavit) के साथ, जिसमें अनुपस्थिति का पर्याप्त कारण या तामील न होने का तथ्य विस्तार से हो।
  3. स्थगन/रोक (stay): डिक्री यदि निष्पादन में है, तो निष्पादन पर रोक के लिए अलग आवेदन साथ लगाएँ, ताकि सुनवाई तक कुर्की/वसूली न हो।
  4. नोटिस व सुनवाई: न्यायालय दूसरे पक्ष को नोटिस देगा; दोनों पक्षों को सुनकर, और यदि आवश्यक हो तो साक्ष्य लेकर, आवेदन पर निर्णय होगा।
  5. डिक्री रद्द होने पर: न्यायालय वाद को उसी चरण पर बहाल कर देता है जहाँ एकपक्षीय कार्यवाही शुरू हुई थी — फिर आपको अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है, जिसमें प्रायः लिखित कथन (Written Statement) दाखिल करने की अनुमति भी शामिल होती है (यह ट्रायल कोर्ट के विवेक पर निर्भर है)।

कौन-कौन से दस्तावेज़ चाहिए

फीस और कितना समय लगता है

आदेश 9 नियम 13 का आवेदन मूल्य-आधारित (ad valorem) कोर्ट फीस नहीं माँगता — इस पर सामान्यतः एक नियत (fixed) विविध कोर्ट फीस लगती है, जिसकी राशि हर राज्य की कोर्ट-फीस अनुसूची पर निर्भर करती है (प्रायः कुछ रुपये से कुछ सौ रुपये तक)। मुख्य खर्च अधिवक्ता की फीस और शपथ-पत्र/प्रमाणित प्रति की लागत होती है। समय की बात करें तो — नोटिस, जवाब और (कभी-कभी) साक्ष्य के कारण इस पर निर्णय में कुछ हफ़्तों से कुछ महीनों तक लग सकते हैं; इसलिए निष्पादन पर रोक का आवेदन साथ लगाना व्यावहारिक रूप से ज़रूरी है।

Order 9 Rule 13 बनाम अपील (Section 96 CPC) — कौन-सा रास्ता

एकपक्षीय डिक्री के विरुद्ध आपके पास दो समानांतर उपाय हैं: (क) उसी कोर्ट में Order 9 Rule 13 का आवेदन, और (ख) धारा 96(2) CPC के तहत उच्च न्यायालय में अपील। दोनों में अंतर समझना ज़रूरी है:

सावधानी: आदेश 9 नियम 13 के स्पष्टीकरण (Explanation) के अनुसार, यदि एकपक्षीय डिक्री के विरुद्ध अपील दायर करके उसे गुण-दोष पर निपटा दिया गया है, तो उसके बाद उसी डिक्री को अपास्त कराने का Order 9 Rule 13 आवेदन नहीं चलेगा। इसलिए दोनों उपाय एक साथ चलाते समय रणनीति सावधानी से बनाएँ — प्रायः पहले Order 9 Rule 13 का प्रयास और अपील को सुरक्षित (सीमा के भीतर) रखना बेहतर होता है।

यदि आपको भविष्य में अपने विरुद्ध किसी कार्यवाही की आशंका है, तो कैविएट याचिका (Section 148A CPC) दायर करने की प्रक्रिया से आप एकपक्षीय आदेश की संभावना पहले ही कम कर सकते हैं।

कब खुद कर सकते हैं, कब वकील ज़रूरी

अगर मामला सीधा है — समन गलत पते पर गया, आपके पास निष्पादन नोटिस से जानकारी की स्पष्ट तारीख है, और 30 दिन के भीतर हैं — तो आवेदन का ढाँचा सरल है। पर जहाँ (क) 30 दिन बीत चुके हों और धारा 5 का विलंब-माफ़ी बचाव चाहिए, (ख) दूसरा पक्ष तामील को "सम्यक" बताकर लड़ रहा हो, या (ग) डिक्री बड़ी राशि/संपत्ति की हो और निष्पादन तेज़ हो — वहाँ अधिवक्ता ज़रूरी है, क्योंकि तथ्यों की प्रस्तुति और केस-विधि (Parimal, G.P. Srivastava) का सही उद्धरण परिणाम बदल देता है।

Urava कैसे मदद करता है

Urava भारतीय कानून के लिए एक AI विधिक-शोध सहायक है जो WhatsApp पर काम करता है। आप हिंदी, मलयालम या अंग्रेज़ी में अपना प्रश्न टाइप कर सकते हैं — या एकपक्षीय डिक्री/निष्पादन नोटिस की स्कैन तस्वीर भेज सकते हैं — और Urava लगभग 10 मिनट में एक उद्धरण-सहित (citation-backed), कोर्ट-रेडी शोध मेमो (PDF) देता है, जिसमें Order 9 Rule 13, Article 123 जैसी सटीक धाराएँ और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय जुड़े होते हैं। हर उद्धरण सत्यापन-योग्य होता है, इसलिए आप ग़लत/काल्पनिक केस-लॉ के जोखिम से बचते हैं। मुफ़्त में 3 शोध आज़माएँ — urava.app/register पर पंजीकरण करें

Frequently Asked Questions

एकपक्षीय डिक्री रद्द कराने की समय-सीमा कितनी है?

परिसीमा अधिनियम, 1963 के Article 123 के अनुसार 30 दिन। सामान्यतः यह डिक्री की तारीख से गिना जाता है, परन्तु यदि समन सम्यक रूप से तामील नहीं हुआ था तो 30 दिन उस तारीख से गिने जाते हैं जब आपको डिक्री की जानकारी हुई (प्रायः निष्पादन नोटिस मिलने पर)।

क्या 30 दिन बीत जाने के बाद भी डिक्री रद्द हो सकती है?

हाँ, संभव है। आप परिसीमा अधिनियम की धारा 5 के तहत विलंब-माफ़ी (condonation of delay) का आवेदन Order 9 Rule 13 के आवेदन के साथ दायर करें और देरी के हर दिन का पर्याप्त कारण शपथ-पत्र में स्पष्ट करें। न्यायालय संतुष्ट होने पर देरी माफ़ कर सकता है।

आवेदन किस न्यायालय में दायर होता है?

आवेदन उसी न्यायालय में दायर होगा जिसने एकपक्षीय डिक्री पारित की थी, न कि अपील न्यायालय में। यह आदेश 9 नियम 13 CPC सपठित धारा 151 के अंतर्गत, समर्थन में शपथ-पत्र के साथ, एक विविध आवेदन के रूप में लगाया जाता है।

डिक्री रद्द कराने के कौन-से आधार हैं?

केवल दो आधार हैं: (1) समन सम्यक रूप से तामील नहीं हुआ था, या (2) प्रतिवादी किसी पर्याप्त कारण (sufficient cause) से सुनवाई के दिन उपस्थित नहीं हो सका। मात्र समन-तामील की अनियमितता पर्याप्त नहीं, यदि कोर्ट संतुष्ट हो कि प्रतिवादी को सुनवाई की जानकारी थी।

Order 9 Rule 13 का आवेदन करें या Section 96 की अपील?

Order 9 Rule 13 केवल तामील/अनुपस्थिति देखता है और उसी कोर्ट में होता है; धारा 96(2) की अपील डिक्री के गुण-दोष को चुनौती देती है। सावधानी: यदि अपील गुण-दोष पर निपट गई तो उसके बाद Order 9 Rule 13 आवेदन नहीं चलेगा (नियम 13 का स्पष्टीकरण)।

क्या डिक्री रद्द होने पर मुकदमा फिर से चलता है?

हाँ। डिक्री अपास्त होने पर न्यायालय वाद को उसी चरण पर बहाल कर देता है जहाँ से एकपक्षीय कार्यवाही शुरू हुई थी, और प्रतिवादी को अपना पक्ष (प्रायः लिखित कथन सहित) रखने का अवसर मिलता है।

Need this researched for your specific matter?

Urava drafts a citation-backed legal research memorandum in about 10 minutes. 3 free memos every month. Start free research →

This article is legal information, not legal advice. Consult a qualified advocate for advice on your specific matter.