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कैविएट याचिका (Caveat Petition) धारा 148A CPC कैसे दायर करें — फीस, 90-दिन वैधता, फॉर्मेट और नोटिस (2026 गाइड)

15 July 2026 · Urava Research Desk

कैविएट याचिका (Caveat Petition) धारा 148A CPC कैसे दायर करें — फीस, 90-दिन वैधता, फॉर्मेट और नोटिस

कैविएट याचिका सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC), 1908 की धारा 148A के तहत उस व्यक्ति द्वारा कोर्ट में दायर की जाने वाली एक एहतियाती (precautionary) याचिका है, जिसे आशंका है कि उसके खिलाफ कोई मुकदमा या आवेदन दायर होने वाला है — इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोर्ट उसका पक्ष सुने बिना कोई एकपक्षीय (ex-parte) अंतरिम आदेश पास न कर दे। कैविएट दायर करने के लिए आप या आपका वकील कोर्ट में एक साधारण याचिका (हलफनामे के साथ) दाखिल करते हैं, कैविएट रजिस्टर में उसका पंजीकरण कराते हैं, नाममात्र कोर्ट फीस भरते हैं, और सामने वाले पक्ष को रजिस्टर्ड पोस्ट (acknowledgement due) से नोटिस भेजते हैं। यह कैविएट दाखिल करने की तारीख से 90 दिन तक प्रभावी रहती है।

यह गाइड वकीलों, लॉ स्टूडेंट्स और आम पक्षकारों के लिए है — कौन कैविएट दायर कर सकता है, फीस, फॉर्मेट, ज़रूरी दस्तावेज़, 90-दिन का नियम, और कोर्ट पर उसका असर, सब step-by-step।

कैविएट याचिका क्या है? (परिभाषा)

कैविएट (Caveat) लैटिन शब्द "caveat" से बना है जिसका अर्थ है "वह सावधान रहे" — कानूनी तौर पर यह कोर्ट को दी गई एक पूर्व-सूचना है कि किसी अपेक्षित मुकदमे या आवेदन पर बिना कैविएटदाता (caveator) को सुने कोई आदेश न दिया जाए।

धारा 148A को CPC में 1976 के संशोधन (Code of Civil Procedure (Amendment) Act, 104 of 1976) द्वारा, भारतीय विधि आयोग की 54वीं रिपोर्ट की सिफ़ारिश पर जोड़ा गया था। इसका मुख्य उद्देश्य एकपक्षीय आदेशों से पक्षकार के हित की रक्षा करना और मुकदमों की बहुलता (multiplicity of proceedings) से बचना है — जैसा कलकत्ता हाई कोर्ट ने Nirmal Chandra Dutta v. Girindra Narayan Roy, AIR 1978 Cal 492 (indiankanoon.org/doc/138052) में स्पष्ट किया।

कौन और कब कैविएट दायर कर सकता है?

धारा 148A(1) के अनुसार, जहाँ किसी दायर या दायर होने वाले (या दायर होने की उम्मीद वाले) मुकदमे/कार्यवाही में कोई आवेदन दिया गया है या दिया जाने वाला है, वहाँ ऐसा कोई भी व्यक्ति जो उस आवेदन की सुनवाई पर कोर्ट के समक्ष उपस्थित होने का अधिकार रखता है, कैविएट दायर कर सकता है।

व्यवहार में कैविएट आमतौर पर इन स्थितियों में लगाई जाती है:

ध्यान दें — कैविएट केवल सिविल कार्यवाहियों के लिए है। यह किसी अपराधिक मामले में लागू नहीं होती; वहाँ अग्रिम जमानत जैसे उपाय अलग हैं (देखें हमारी हिंदी गाइड — BNSS धारा 482 अग्रिम जमानत याचिका कैसे दायर करें)।

कैविएट याचिका कैसे दायर करें — Step-by-Step

चरण 1: सही कोर्ट चुनें

कैविएट उसी कोर्ट में दायर करें जहाँ आवेदन/अपील दायर होने की उम्मीद है — यानी उस अदालत में जिसके पास मामले का क्षेत्राधिकार (jurisdiction) होगा (ट्रायल कोर्ट, ज़िला कोर्ट, हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट)।

चरण 2: कैविएट याचिका और हलफनामा तैयार करें

याचिका में स्पष्ट रूप से लिखें: - पक्षकारों के नाम (कैविएटदाता और अपेक्षित आवेदक/कैविएटी), - आवेदन की प्रकृति जो दायर होने की उम्मीद है (जैसे — अपील, स्थगन आवेदन, injunction), - वह अधिकार जिसके आधार पर कैविएटदाता सुनवाई में उपस्थित होना चाहता है, - मूल आदेश/डिक्री की प्रति (यदि लागू हो)। साथ में एक हलफनामा (affidavit) लगाएँ।

चरण 3: कोर्ट फीस और रजिस्ट्रेशन

कैविएट पर नाममात्र कोर्ट फीस लगती है (राज्य व कोर्ट के अनुसार आम तौर पर लगभग ₹50–₹500 के बीच; अलग-अलग हाई कोर्ट के नियमों में यह भिन्न होती है)। इसे फाइलिंग काउंटर पर जमा कर कैविएट रजिस्टर में पंजीकृत कराएँ। वकील के माध्यम से दायर कर रहे हों तो वकालतनामा (vakalatnama) लगाएँ।

चरण 4: विरोधी पक्ष को नोटिस भेजें (अनिवार्य)

धारा 148A(2) के तहत, कैविएट दायर करने वाला व्यक्ति रजिस्टर्ड पोस्ट (acknowledgement due) के ज़रिए अपेक्षित आवेदक को कैविएट का नोटिस भेजने के लिए बाध्य है। यह नोटिस भेजना अनिवार्य है — इसकी रसीद संभालकर रखें।

कैविएट के बाद कोर्ट और पक्षकारों के दायित्व

एक बार कैविएट सही तरीके से दायर हो जाने पर:

कर्नाटक हाई कोर्ट ने G.C. Siddalingappa v. G.C. Veeranna, AIR 1981 Kar 242 (indiankanoon.org/doc/1067057) में माना कि कैविएटदाता को नोटिस देना अंतरिम आदेश पास करने की एक पूर्व-शर्त (condition precedent) है — यह शर्त पूरी हुए बिना कोर्ट ऐसा आदेश नहीं दे सकती जो कैविएटदाता को प्रभावित करे।

अगली 5 बातें जो अक्सर पूछी जाती हैं

1. कैविएट कितने दिन तक वैध रहती है? (90-दिन का नियम)

धारा 148A(5) के अनुसार कैविएट दायर होने की तारीख से 90 दिन तक ही प्रभावी रहती है। 90 दिन बीत जाने पर, अगर उस बीच कोई आवेदन दायर नहीं हुआ, तो कैविएट स्वतः समाप्त हो जाती है और सुरक्षा जारी रखने के लिए नई कैविएट दायर करनी होती है। इसलिए तारीख का ध्यान रखना ज़रूरी है।

2. कैविएट दायर करने में कितना खर्च और समय लगता है?

यह कम खर्च और तेज़ उपाय है — कोर्ट फीस नाममात्र (लगभग ₹50–₹500) और वकील की फीस अलग। ज़्यादातर मामलों में कैविएट उसी दिन दायर व रजिस्टर हो जाती है; अलग सुनवाई की ज़रूरत नहीं होती।

3. कौन-से दस्तावेज़ चाहिए?

कैविएट याचिका, हलफनामा (affidavit), मूल आदेश/डिक्री की प्रति (यदि हो), वकालतनामा (वकील के माध्यम से), और रजिस्टर्ड पोस्ट नोटिस का प्रमाण।

4. अगर 90 दिन बीत गए और सामने वाले ने अभी तक अपील नहीं की तो?

तो पुरानी कैविएट खत्म मानी जाएगी। अगर आशंका बनी हुई है तो नई कैविएट दायर कर 90 दिन की अवधि नए सिरे से शुरू करें।

5. कैविएट खुद दायर करें या वकील से?

सरल मामलों में पक्षकार खुद भी दायर कर सकते हैं, पर आवेदन की सही प्रकृति व कोर्ट का चुनाव और नोटिस की प्रक्रिया में गलती महँगी पड़ सकती है — जटिल या ऊँचे-दांव वाले मामलों (हाई कोर्ट/सुप्रीम कोर्ट अपील, बड़ी संपत्ति) में वकील से दायर कराना बेहतर है।

कैविएट, स्थगन और अंतरिम राहत का आपस में संबंध

कैविएट का पूरा मकसद यही है कि विरोधी पक्ष आपको सुने बिना एकपक्षीय अंतरिम राहत (ex-parte interim relief) न ले पाए। यही सिद्धांत मध्यस्थता (arbitration) जैसे क्षेत्रों में भी लागू होता है — जहाँ पक्षकार अदालत से अंतरिम राहत माँगते हैं। इस विषय को गहराई से समझने के लिए देखें हमारी गाइड — धारा 9 मध्यस्थता अधिनियम के तहत अंतरिम राहत कैसे लें (Delhi HC प्रक्रिया)। इसी तरह अपील दायर होने की आशंका में कैविएट आम है — जैसे किसी अपीलीय ट्रिब्यूनल में; प्रक्रिया समझने के लिए देखें RERA अपील (K-REAT) कैसे दायर करें

मुख्य बात: कैविएट कोई राहत नहीं माँगती — यह सिर्फ़ यह सुनिश्चित करती है कि कोर्ट आपको सुने बिना विरोधी पक्ष को राहत न दे। यह "पहले सुनवाई का अधिकार" सुरक्षित करने वाला रक्षा-कवच है।

Frequently Asked Questions

कैविएट याचिका दायर करने की फीस कितनी है?

कैविएट पर नाममात्र कोर्ट फीस लगती है, जो राज्य और कोर्ट के नियमों के अनुसार आम तौर पर लगभग ₹50 से ₹500 के बीच होती है। इसके अलावा वकील की फीस अलग से लगती है। यह भारतीय अदालतों में उपलब्ध सबसे सस्ते एहतियाती उपायों में से एक है और आमतौर पर उसी दिन दायर हो जाती है।

कैविएट कितने समय तक मान्य रहती है?

धारा 148A(5) CPC के अनुसार कैविएट दायर करने की तारीख से अधिकतम 90 दिन तक ही प्रभावी रहती है। इस अवधि में अगर कोई आवेदन दायर नहीं होता तो कैविएट स्वतः समाप्त हो जाती है, और सुरक्षा जारी रखने के लिए 90 दिन के भीतर नई कैविएट दायर करनी पड़ती है।

क्या कैविएट के बिना कोर्ट एकपक्षीय आदेश दे सकती है?

हाँ। अगर आपने कैविएट दायर नहीं की है, तो विरोधी पक्ष आपको सुने बिना कोर्ट से एकपक्षीय (ex-parte) स्थगन या अंतरिम आदेश ले सकता है। कैविएट दायर होने पर कोर्ट, धारा 148A(3) के तहत, कैविएटदाता को नोटिस दिए बिना ऐसा आदेश नहीं दे सकती।

कैविएट दायर करने के लिए कौन-से दस्तावेज़ चाहिए?

मुख्य दस्तावेज़ हैं — कैविएट याचिका, हलफनामा (affidavit), मूल आदेश या डिक्री की प्रति (यदि लागू हो), वकील के माध्यम से दायर करने पर वकालतनामा, और अपेक्षित आवेदक को भेजे गए रजिस्टर्ड पोस्ट नोटिस का प्रमाण। नोटिस भेजना धारा 148A(2) के तहत अनिवार्य है।

क्या कैविएट सिर्फ़ सिविल मामलों में दायर होती है?

हाँ, धारा 148A CPC केवल सिविल मुकदमों और कार्यवाहियों पर लागू होती है। आपराधिक मामलों में कैविएट का प्रावधान नहीं है; वहाँ अग्रिम जमानत जैसे अलग उपाय होते हैं। कैविएट का उद्देश्य सिविल कार्यवाही में एकपक्षीय अंतरिम आदेश से बचाव करना है।

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अस्वीकरण: यह सामग्री सामान्य कानूनी जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी विशिष्ट मामले में योग्य अधिवक्ता से परामर्श लें। प्रक्रिया व फीस राज्य/कोर्ट के नियमों के अनुसार भिन्न हो सकती है।

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