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हलफनामा / शपथ पत्र (Affidavit) कैसे बनाएं — भारत में: प्रारूप, सत्यापन खंड (Order 19 CPC / Order 6 Rule 15), राज्यवार स्टाम्प पेपर, नोटरी व शपथ आयुक्त, और कोर्ट में कब अस्वीकार होता है (2026 हिंदी गाइड)

28 October 2026 · Urava Research Desk

हलफनामा (affidavit) बनाने के लिए तीन चीज़ें ज़रूरी हैं: (1) तथ्यों को क्रमांकित पैराग्राफ में, पहले पुरुष ('मैं…') में, और सिर्फ़ उतना ही लिखें जितना आप स्वयं जानते हैं; (2) अंत में एक सत्यापन खंड (verification clause) जोड़ें जो यह साफ़ करे कि कौन-से पैराग्राफ आपकी निजी जानकारी पर और कौन-से सूचना/विश्वास (information and belief) पर आधारित हैं; और (3) इसे नोटरी या शपथ आयुक्त (Oath Commissioner) के सामने शपथ/प्रतिज्ञान लेकर हस्ताक्षरित कराएँ। कोर्ट में दाखिल होने वाला हलफनामा Code of Civil Procedure, 1908 के Order XIX के अनुसार होता है और उस पर प्रायः अलग से स्टाम्प ड्यूटी नहीं लगती; कोर्ट के बाहर के कामों (पासपोर्ट, नाम-परिवर्तन, पता-प्रमाण आदि) के लिए राज्य के नियम अनुसार सामान्यतः ₹10–₹100 का गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर या ई-स्टाम्प लगता है।

हलफनामा एक लिखित बयान है जिसे शपथकर्ता (deponent) शपथ या प्रतिज्ञान के तहत, किसी अधिकृत अधिकारी के समक्ष, सत्य के रूप में सत्यापित करता है — और उसमें लिखी हर बात के लिए वह कानूनन जवाबदेह होता है। यही जवाबदेही हलफनामे को एक साधारण आवेदन या पत्र से अलग करती है: झूठ लिखने पर यह झूठी गवाही (false evidence) का अपराध बन जाता है।

हलफनामे का सही प्रारूप (format) — भाग-दर-भाग

भारत में हलफनामे का कोई एक 'सरकारी फ़ॉर्म' नहीं है — इसकी बनावट अदालती अभ्यास और Order XIX CPC के सिद्धांतों से तय होती है। एक सही हलफनामे में ये हिस्से होने चाहिए:

  1. शीर्षक (title/cause-title): अगर किसी केस में दाखिल हो रहा है तो कोर्ट का नाम, केस संख्या और पक्षकारों के नाम ऊपर लिखें। स्वतंत्र हलफनामे पर सिर्फ़ 'शपथ पत्र / AFFIDAVIT' लिखें।
  2. शपथकर्ता का परिचय: 'मैं, [पूरा नाम], पुत्र/पुत्री/पत्नी [नाम], आयु लगभग [__] वर्ष, निवासी [पूरा पता], एतद्द्वारा शपथपूर्वक/प्रतिज्ञापूर्वक कथन करता/करती हूँ कि—'
  3. मुख्य भाग (body): हर तथ्य एक अलग, क्रमांकित पैराग्राफ में। केवल प्रासंगिक तथ्य लिखें, कानूनी दलील या राय नहीं।
  4. सत्यापन खंड (verification): नीचे अलग से (देखें अगला सेक्शन)।
  5. स्थान, तारीख, शपथकर्ता के हस्ताक्षर, और सबसे नीचे नोटरी/शपथ आयुक्त का अनुप्रमाणन (attestation), मुहर व क्रमांक।

इस तरह के क्रमांकित, तथ्य-आधारित प्रारूप का अभ्यास दूसरे ड्राफ्टों में भी काम आता है — जैसे तलाक याचिका का लिखित जवाब (written statement) कैसे लिखें में, जहाँ 2002 संशोधन के बाद लिखित कथन के साथ Order VI Rule 15(4) का सत्यापन हलफनामा अनिवार्य है।

सत्यापन खंड (verification clause) — यहीं सबसे ज़्यादा हलफनामे कमज़ोर होते हैं

Order XIX Rule 3, CPC कहता है कि हलफनामा केवल उन तथ्यों तक सीमित होगा जिन्हें शपथकर्ता अपनी निजी जानकारी (personal knowledge) से साबित कर सकता है — सिवाय अंतरिम (interlocutory) आवेदनों के, जहाँ 'विश्वास' के आधार पर कथन मान्य है बशर्ते उसके आधार (grounds) बताए जाएँ। इसलिए सत्यापन खंड में यह अलग-अलग करना ज़रूरी है कि कौन-सा पैराग्राफ किस आधार पर है:

"मैं, उपरोक्त शपथकर्ता, सत्यापित करता/करती हूँ कि इस हलफनामे के पैराग्राफ 1 से [] तक की बातें मेरी निजी जानकारी के अनुसार सत्य हैं, तथा पैराग्राफ [] से [] तक की बातें मुझे प्राप्त सूचना एवं विश्वास के आधार पर सत्य हैं, जिन्हें मैं सत्य मानता/मानती हूँ। इसमें कुछ भी छिपाया नहीं गया है। आज दिनांक [] को [स्थान] पर सत्यापित किया गया।"

अदालतों ने बार-बार ऐसे हलफनामे ख़ारिज किए हैं जहाँ शपथकर्ता ने 'हर पैराग्राफ मेरी जानकारी और विश्वास दोनों के अनुसार सत्य है' जैसा गोलमोल (defective) सत्यापन लगाया — क्योंकि इससे अदालत यह तय नहीं कर पाती कि किस बात पर जिरह (cross-examination) संभव है। जहाँ बात 'सूचना' पर आधारित हो, वहाँ सूचना का स्रोत भी बताना चाहिए।

हलफनामा किसके सामने सत्यापित कराएँ — नोटरी बनाम शपथ आयुक्त

Section 139, CPC के अनुसार हलफनामे पर शपथ कोई भी न्यायालय या मजिस्ट्रेट, या Notaries Act, 1952 के तहत नियुक्त कोई नोटरी, या उच्च न्यायालय द्वारा इस हेतु नियुक्त व्यक्ति (शपथ आयुक्त) दिला सकता है। शपथ दिलाने की सामान्य शक्ति Oaths Act, 1969 की धारा 3 से आती है, और नोटरी के कार्यों में शपथ दिलाना व हलफनामा लेना Notaries Act, 1952 की धारा 8 के अंतर्गत आता है।

स्टाम्प पेपर — कोर्ट के भीतर बनाम बाहर

यह सबसे आम भ्रम है। Indian Stamp Act, 1899 की Schedule I, Article 4 हलफनामे पर ड्यूटी लगाती है, पर उसकी छूट (b) के अनुसार जो हलफनामा 'किसी न्यायालय में दाखिल या उपयोग के तत्काल प्रयोजन' के लिए बनाया गया हो, वह प्रायः स्टाम्प ड्यूटी से मुक्त है।

हलफनामे का उद्देश्य स्टाम्प की स्थिति (सामान्य नियम)
कोर्ट में दाखिल/उपयोग हेतु (judicial proceeding) Article 4 की छूट (b) के तहत प्रायः स्टाम्प ड्यूटी से मुक्त; केवल कोर्ट-फ़ीस व शपथ आयुक्त का नाममात्र शुल्क
कोर्ट के बाहर (पासपोर्ट, नाम/पता-प्रमाण, पेंशन, हलफ़नामा-प्रूफ़) राज्य के स्टाम्प अधिनियम अनुसार गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर/ई-स्टाम्प — सामान्यतः ₹10–₹100

राज्यवार दरें अलग हैं और बदलती रहती हैं — उदाहरण के लिए दिल्ली में प्रायः ₹10 का गैर-न्यायिक स्टाम्प, उत्तर प्रदेश में कोर्ट-उपयोग पर मामूली दर, जबकि कुछ राज्यों (जैसे महाराष्ट्र में कुछ प्रकार के हलफनामों) ने स्टाम्प की जगह सादे काग़ज़ की अनुमति दी है। इसलिए दाखिल करने से पहले अपने ज़िले के स्टाम्प विक्रेता/सब-रजिस्ट्रार या उस कार्यालय से पुष्टि कर लें जहाँ हलफनामा लगना है। कम मूल्य के स्टाम्प पर बना हलफनामा 'स्टाम्प में कमी' के कारण ख़ारिज हो सकता है।

कितना खर्च और कितना समय लगता है?

सामान्य, एक-पेज का हलफनामा बहुत सस्ता और तेज़ है: स्टाम्प/ई-स्टाम्प (₹0–₹100, उद्देश्य व राज्य पर निर्भर) + नोटरी/शपथ आयुक्त शुल्क (प्रायः ₹10–₹50, कहीं-कहीं ₹100 तक)। टाइपिंग व अटेस्टेशन मिलाकर आमतौर पर उसी दिन, कुछ ही घंटों में तैयार हो जाता है। जटिल हलफनामे (संपत्ति, वंशावली, क्षतिपूर्ति-बांड आदि) में समय ड्राफ्टिंग में लगता है, अटेस्टेशन में नहीं।

हलफनामे के साथ कौन-से विवरण/दस्तावेज़ तैयार रखें

कोर्ट हलफनामा कब अस्वीकार (reject) करता है?

सबसे आम कारण: (1) दोषपूर्ण सत्यापन — निजी जानकारी व विश्वास को अलग न करना; (2) तथ्यों के बजाय दलील/राय भर देना (Order XIX Rule 3 का उल्लंघन); (3) अदिनांकित या अहस्ताक्षरित हलफनामा, या अटेस्टेशन-मुहर/क्रमांक का अभाव; (4) गलत/कम स्टाम्प; (5) 'सूचना' पर आधारित कथन में स्रोत न बताना। ऐसे दोष अक्सर ठीक कराकर दोबारा दाखिल किए जा सकते हैं, पर इससे समय लगता है। ध्यान दें — Order XIX Rule 2 के तहत अदालत शपथकर्ता को जिरह के लिए बुला सकती है, इसलिए हलफनामे की हर बात रक्षात्मक (defensible) होनी चाहिए।

झूठा हलफनामा — कानूनी परिणाम (BNS 227/229, BNSS 379)

हलफनामे में जानबूझकर झूठ लिखना झूठी गवाही है। Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 की धारा 227 (झूठा साक्ष्य देना — पुरानी IPC धारा 191) और धारा 229 (झूठे साक्ष्य के लिए दंड — पुरानी IPC धारा 193) लागू होती हैं; न्यायिक कार्यवाही में झूठे साक्ष्य पर 7 वर्ष तक कारावास व जुर्माना, अन्यथा 3 वर्ष तक हो सकता है। प्रक्रिया अलग है: BNSS, 2023 की धारा 215 के कारण कोई निजी व्यक्ति सीधे परजरी की शिकायत दर्ज नहीं करा सकता — पहले उसी न्यायालय से, जहाँ झूठा हलफनामा दिया गया, BNSS धारा 379 (पुरानी CrPC धारा 340) के तहत प्रारंभिक संतुष्टि व शिकायत कराना पड़ता है, और अदालत इसके लिए बाध्य नहीं, विवेकाधीन है।

खुद बनाएं या वकील से — कब क्या ठीक है

सीधे-सादे प्रशासनिक हलफनामे (नाम/पता-प्रमाण, गुमशुदा दस्तावेज़, एकल-तथ्य घोषणा) आप स्वयं बना सकते हैं। पर जहाँ हलफनामा किसी मुकदमे का हिस्सा हो — जैसे अस्थायी निषेधाज्ञा / स्टे ऑर्डर के आवेदन के साथ (Order 39 CPC), जहाँ आवेदन को सहारा देने वाला हलफनामा ही केस की जान होता है, या कैविएट याचिका (Section 148A CPC) दायर करते समय — वहाँ सत्यापन व तथ्यों की सटीकता इतनी मायने रखती है कि वकील से बनवाना या जँचवाना समझदारी है। एक कमज़ोर हलफनामा पूरे आवेदन को गिरा सकता है।

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Urava आपके टाइप किए सवाल या स्कैन किए मलयालम/हिंदी/अंग्रेज़ी दस्तावेज़ से ~10 मिनट में कोर्ट-योग्य, citation-सहित रिसर्च मेमो (PDF) तैयार करता है — ताकि हलफनामे/याचिका में लगाए जाने वाले तथ्य और धाराएँ (जैसे Order XIX CPC, Section 139 CPC, Indian Stamp Act Article 4) सही संदर्भ के साथ हों, न कि अनुमान पर। WhatsApp पर काम करता है; शुरुआत मुफ़्त 3 रिसर्च से, फिर ₹100/10 रिसर्च से। urava.app पर रजिस्टर करें और अपनी पहली रिसर्च मुफ़्त आज़माएँ।

नोट: यह सामान्य कानूनी जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। स्टाम्प-दरें व राज्य-विशिष्ट नियम बदलते रहते हैं; अपने ज़िले के नोटरी/सब-रजिस्ट्रार या वकील से पुष्टि करें। प्राथमिक स्रोत: Code of Civil Procedure, 1908 (Order XIX, Order VI Rule 15, Section 139) — indiacode.nic.in; Oaths Act, 1969 व Notaries Act, 1952 — indiacode.nic.in; Indian Stamp Act, 1899; Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (ss. 227, 229) व Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (ss. 215, 379).

Frequently Asked Questions

हलफनामा और शपथ पत्र में क्या अंतर है?

कोई अंतर नहीं — 'शपथ पत्र' हलफनामे (affidavit) का ही हिंदी नाम है। यह शपथ/प्रतिज्ञान के तहत दिया गया लिखित, सत्यापित बयान है, जिसे नोटरी या शपथ आयुक्त अनुप्रमाणित करते हैं। कुछ लोग 'एफिडेविट', 'घोषणा-पत्र' या 'शपथ-पत्र' नाम से भी इसे पुकारते हैं, पर कानूनी रूप से यह एक ही दस्तावेज़ है।

हलफनामे पर कितने रुपये का स्टाम्प पेपर लगता है?

यह उद्देश्य और राज्य पर निर्भर है। कोर्ट में दाखिल होने वाले हलफनामे पर Indian Stamp Act की Article 4 छूट (b) के तहत प्रायः स्टाम्प ड्यूटी नहीं लगती। कोर्ट के बाहर के कामों के लिए राज्य अनुसार सामान्यतः ₹10–₹100 का गैर-न्यायिक स्टाम्प/ई-स्टाम्प लगता है। दाखिल करने से पहले स्थानीय स्टाम्प विक्रेता से पुष्टि कर लें।

क्या हलफनामा नोटरी से अटेस्ट कराना अनिवार्य है?

हाँ, लगभग हमेशा। हलफनामे की वैधता शपथ/प्रतिज्ञान पर टिकी है, जो Section 139 CPC के अनुसार किसी न्यायालय/मजिस्ट्रेट, Notaries Act 1952 के तहत नियुक्त नोटरी, या उच्च न्यायालय-नियुक्त शपथ आयुक्त के समक्ष ली जाती है। बिना अटेस्टेशन-मुहर, क्रमांक व तारीख के हलफनामा अधूरा माना जाता है और अस्वीकार हो सकता है।

सत्यापन खंड (verification) में क्या लिखें?

सत्यापन खंड में यह अलग-अलग बताएँ कि कौन-से पैराग्राफ आपकी निजी जानकारी पर और कौन-से सूचना/विश्वास पर आधारित हैं, तथा स्थान व तारीख लिखें। Order XIX Rule 3 CPC के अनुसार यह अलगाव ज़रूरी है; 'हर बात जानकारी और विश्वास दोनों से सत्य है' जैसा गोलमोल सत्यापन अदालत में दोषपूर्ण माना जाता है।

झूठा हलफनामा देने पर क्या सजा है?

जानबूझकर झूठा हलफनामा झूठी गवाही का अपराध है — Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 की धारा 227 व 229 के तहत न्यायिक कार्यवाही में 7 वर्ष तक कारावास व जुर्माना हो सकता है। पर प्रक्रिया पर रोक है: BNSS धारा 215 के कारण निजी व्यक्ति सीधे शिकायत नहीं कर सकता; पहले संबंधित न्यायालय से BNSS धारा 379 के तहत शिकायत करानी पड़ती है।

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