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BNSS धारा 482 अग्रिम जमानत: याचिका कैसे दायर करें — स्टेप-बाय-स्टेप गाइड (2025)

24 June 2026 · Urava Research Desk

1 जुलाई 2024 के बाद के सभी FIR पर BNSS लागू होता है। अग्रिम जमानत की पुरानी धारा 438 CrPC अब BNSS धारा 482 बन चुकी है — और इसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं जो हर वकील को जानने चाहिए।

सीधा उत्तर: यदि आपके मुवक्किल को किसी गैर-जमानती अपराध में गिरफ्तारी की आशंका है, तो BNSS धारा 482 के तहत सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत आवेदन दायर किया जा सकता है। CrPC की तुलना में BNSS 482 में न्यायालयों को अधिक विवेकाधिकार है और NDPS जैसे मामलों में राज्य-स्तरीय प्रतिबंध समाप्त हो गए हैं।


BNSS धारा 482: प्रावधान का सार

BNSS 482(1) के अनुसार — जब किसी व्यक्ति को उचित विश्वास हो कि उसे किसी गैर-जमानती अपराध में गिरफ्तार किया जा सकता है, तो वह सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय में निर्देश के लिए आवेदन कर सकता है। न्यायालय यदि उचित समझे, तो यह निर्देश दे सकता है कि गिरफ्तारी होने की स्थिति में उसे जमानत पर रिहा किया जाए।

महत्वपूर्ण: केवल याचिका दायर करने से गिरफ्तारी से सुरक्षा नहीं मिलती। सुरक्षा तभी मिलती है जब न्यायालय आदेश पारित करे।


CrPC 438 बनाम BNSS 482: क्या बदला?

पहलू CrPC धारा 438 BNSS धारा 482
मार्गदर्शक कारक अपराध की प्रकृति/गंभीरता, पूर्व रिकॉर्ड, भागने की आशंका — सूचीबद्ध थे ये विशेष कारक हटाए गए; न्यायालय को व्यापक विवेकाधिकार
मृत्युदंड/आजीवन कारावास कुछ राज्य संशोधनों से प्रतिबंधित (जैसे UP) कोई प्रतिबंध नहीं — राज्य संशोधन समाप्त
NDPS मामले (UP) CrPC UP संशोधन से बाधित BNSS 482 UP संशोधन पर प्रभावी (Allahabad HC 2025)
न्यायालय का विवेक अपेक्षाकृत सीमित व्यापक (Chhattisgarh HC 2024)
अवधि विवादास्पद Sushila Aggarwal 2020 INSC 106 — सामान्यतः मुकदमे के अंत तक
लागू तिथि 30 जून 2024 तक 1 जुलाई 2024 से सभी नए FIR पर

अग्रिम जमानत कब मिल सकती है?

न्यायालय निम्नलिखित पहलुओं पर विचार करता है:

BNSS के तहत नया मानक: Chhattisgarh HC (2024) ने स्पष्ट किया कि CrPC 438 के निर्दिष्ट कारकों को हटाने से न्यायालय अब मामले की विशिष्ट परिस्थितियों के आधार पर स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकता है।


याचिका कहाँ दायर करें?

BNSS 482(1) के तहत अग्रिम जमानत दो न्यायालयों में दायर की जा सकती है:

1. सत्र न्यायालय (Court of Session)

2. उच्च न्यायालय (High Court)

सावधानी: सत्र न्यायालय और उच्च न्यायालय में एक साथ (concurrent) याचिका उचित नहीं मानी जाती।


स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया: BNSS 482 याचिका कैसे दायर करें

Step 1 — FIR और आरोप की जानकारी एकत्र करें

Step 2 — याचिका का मसौदा तैयार करें

याचिका में अनिवार्य रूप से शामिल करें: - आवेदक का पूरा परिचय और पता - FIR का विवरण और आरोपों की धाराएँ - गिरफ्तारी की आशंका के तथ्य और कारण - आवेदक की जाँच में सहयोग की तैयारी - पूर्व में कोई आपराधिक मामला न होने का कथन (यदि लागू) - राहत के लिए प्रार्थना: गिरफ्तारी होने पर जमानत पर रिहाई का निर्देश

Step 3 — शपथपत्र (Affidavit) तैयार करें

BNSS 482 याचिका के साथ आवेदक का शपथपत्र अनिवार्य है। नोटरी या कमीशन से सत्यापन करवाएँ।

Step 4 — न्यायालय शुल्क जमा करें

दस्तावेज़ अनुमानित शुल्क
याचिका पर कोर्ट फी ₹20–50
शपथपत्र ₹20
वकालतनामा ₹15–25
अधिवक्ता कल्याण स्टाम्प ₹50
प्रमाणित प्रति ₹10/पृष्ठ

उच्च न्यायालय में शुल्क अधिक होता है — प्रत्येक HC की वेबसाइट से नवीनतम fee schedule देखें।

Step 5 — दाखिल करें (E-Filing या भौतिक)

Step 6 — नोटिस और सुनवाई

Step 7 — आदेश के बाद की कार्यवाही

  1. आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त करें
  2. सम्बंधित थाने को आदेश की प्रति दें
  3. गिरफ्तारी होने पर — थाने में आदेश दिखाएँ, ज़मानती प्रस्तुत करें, मुक्त हों
  4. सभी शर्तों का पालन सुनिश्चित करें

न्यायालय द्वारा लगाई जाने वाली सामान्य शर्तें

BNSS 482(2) के तहत न्यायालय निम्न शर्तें लगा सकता है:

  1. जाँच में सहयोग — पुलिस द्वारा बुलाए जाने पर उपस्थित होना
  2. साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करना
  3. गवाहों को प्रभावित न करना
  4. देश न छोड़ना — न्यायालय की अनुमति के बिना
  5. पासपोर्ट जमा करना — थाने या न्यायालय में
  6. नियमित उपस्थिति — थाने में हाज़िरी (गंभीर मामलों में)

प्रमुख न्यायालय निर्णय

1. सुशीला अग्रवाल v. राज्य (NCT दिल्ली) — 2020 INSC 106

सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय संविधान पीठ (29 जनवरी 2020)

2. सुधीर कुमार चौरसिया v. UP राज्य — 2025:AHC-LKO:34988

Allahabad HC Lucknow Bench, जून 2025

3. Chhattisgarh High Court — 2024

SCC Online Blog, 30 September 2024


अग्रिम जमानत रद्द कब हो सकती है?

BNSS 482(5) के तहत अग्रिम जमानत रद्द की जा सकती है: - शर्तों का उल्लंघन (जाँच में असहयोग, देश छोड़ना) - साक्ष्यों से छेड़छाड़ - गवाहों को धमकाना या प्रलोभन देना - नए गंभीर तथ्यों का सामने आना


BNSS में जमानत की अन्य महत्वपूर्ण धाराएँ

धारा विषय CrPC समकक्ष
BNSS 478 जमानती अपराधों में जमानत CrPC 436
BNSS 479 लम्बित मुकदमे में ज़मानत (undertrial) CrPC 436A
BNSS 480 गैर-जमानती अपराध में जमानत CrPC 437
BNSS 482 अग्रिम जमानत CrPC 438
BNSS 483 उच्च न्यायालय/सत्र न्यायालय की विशेष शक्तियाँ CrPC 439

जमानत की शर्तों में बदलाव की प्रक्रिया के लिए BNSS 480 गाइड पढ़ें


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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: BNSS 482 के तहत हत्या के मामले में भी अग्रिम जमानत मिल सकती है? हाँ। BNSS 482 में CrPC 438(6) जैसा कोई प्रतिबंध नहीं है। मृत्युदंड या आजीवन कारावास के अपराधों में भी याचिका विचारणीय है, हालाँकि न्यायालय अत्यंत सावधानी से विचार करेगा।

प्रश्न 2: चार्जशीट दाखिल होने के बाद अग्रिम जमानत खत्म हो जाती है? नहीं। Sushila Aggarwal v State (NCT of Delhi) 2020 INSC 106 के अनुसार अग्रिम जमानत सामान्यतः मुकदमे के अंत तक चलती है और चार्जशीट दाखिल होने पर स्वतः समाप्त नहीं होती।

प्रश्न 3: सत्र न्यायालय और उच्च न्यायालय में एक साथ याचिका दायर कर सकते हैं? सामान्यतः नहीं। पहले सत्र न्यायालय में जाएँ; अस्वीकृति के बाद उच्च न्यायालय जाएँ।

प्रश्न 4: UP में NDPS मामले में अग्रिम जमानत मिल सकती है? हाँ। Allahabad HC (2025:AHC-LKO:34988) ने स्पष्ट किया कि BNSS 482 UP के CrPC संशोधन पर प्रभावी है। NDPS Act की धारा 37 की कठोर शर्तें अभी भी लागू होंगी।

प्रश्न 5: अग्रिम जमानत याचिका के लिए कौन-से दस्तावेज़ ज़रूरी हैं? (1) FIR की प्रमाणित प्रति, (2) आवेदक का शपथपत्र, (3) वकालतनामा, (4) पहचान प्रमाण, (5) गिरफ्तारी की आशंका का साक्ष्य (नोटिस/समन, यदि कोई हो)।

प्रश्न 6: अग्रिम जमानत मिलने के बाद गिरफ्तारी होने पर क्या करें? तुरंत न्यायालय का आदेश पुलिस को दिखाएँ। BNSS 482(3) के तहत ज़मानती प्रस्तुत करने पर रिहाई अनिवार्य है। यदि पुलिस मना करे — उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) दायर करें।

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